SIR से पहले उत्तराखंड में वोटर मैपिंग की गई शुरू, इन मतदाताओं को किया जा रहा चिह्नित

SIR से पहले उत्तराखंड में वोटर मैपिंग की गई शुरू, इन मतदाताओं को किया जा रहा चिह्नित

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशन में उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग भी मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू कर रहा है। आयोग ने राजनीतिक दलों से अपने बूथ प्रबंधन पर काम करने का आग्रह किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ बी. वी. पुरुषोत्तम ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ये आग्रह किया है कि वे मतदाता पुनर्निरीक्षण को गंभीरता से ले ,उन्होंने 11733 पोलिंग बूथों पर एक एक प्रतिनिधि (बीएलओ,) नियुक्त कर उन्हें मतदाता सूचियों में दर्ज फालतू नाम हटाने और यदि कोई अन्य आपत्ति है तो उसे दर्ज किए जाने के लिए दिशा निर्देश दिए जा रहे है। राज्य की 70 विधानसभाओं में मतदाताओं को अब अपने नाम स्वयं मतदाता सूची में खोजने होंगे।यदि नाम नहीं है तो दर्ज कराने के लिए जरूरी दस्तावेज देने होंगे । यदि उनका नाम देश में कहीं भी और दर्ज है तो उसे हटवाना होगा। उत्तराखंड में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर SIR लागू किया जा रहा है। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार उसे ये अधिकार हैं कि वो अनुच्छेद 324 , 1950 की धारा 21के तहत मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण कराए।देश भर में उक्त प्रक्रिया अपननेब्स लगभग दस करोड़ मतदाताओं के बाहर हो जाने की उम्मीद है इससे देश में चुनाव का मत प्रतिशत भी बढ़ेगा। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में बहुत से मतदाता ऐसे है जिनके दो या उससे भी ज्यादा स्थानों पर पर नाम दर्ज रहने के मामले सामने आए थे, कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में ऐसे नाम पकड़ में आए थे। देश के एक ही बूथ की मतदाता सूची पर नाम हो ऐसे व्यवस्था निर्वाचन आयोग सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयासरत है।उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो उत्तर प्रदेश से सटे हैं और यहां मतदाता सूची पर पूर्व में भी संदेह व्यक्त किया जाता रहा है कि कुछ मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी हैं। एसएआर होने से ऐसे नामों को काटा जा सकेगा। कांग्रेस एसएआर के विरोध में रही है क्योंकि पार्टी को लगता है कि एनडीए सरकार के इशारे पर निर्वाचन आयोग एसआईआर लागू कर रहा है, इस विषय को लेकर चुनाव आयोग और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच वाक युद्ध होता रहा है।कांग्रेस को लगता है कि बीजेपी एसआईआर के बहाने उसके मुस्लिम वोट बैंक पर डाका डाल रही है। जबकि बीजेपी का कहना है कि घुसपैठियों को मतदाता सूची में स्थान नहीं दिया जा सकता। उत्तराखंड में कांग्रेस इसी तरह का एसआईआर का विरोध करने का मन बना चुकी है। जबकि बीजेपी ने एसआईआर का स्वागत किया है।

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