
देहरादून: उत्तराखंड की सबसे पुरानी रीजीनल पार्टी – उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्य रहे दिवाकर भट्ट का 79 साल की आयु में मंगलवार को निधन हो गया. ट्रेड यूनियन नेता के तौर पर पॉलिटिकल सफर शुरू करने वाले दिवाकर भट्ट को उनके एग्रेसिव तेवर के चलते, यूकेडी के संरक्षक इंद्रमणि बड़ौनी ने “फील्ड मार्शल” कहा था. उत्तराखंड राज्य के गठन को लेकर दिवाकर भट्ट टिहरी जिले की एक बहुत ऊंची छोटी खैट पर्वत पर चले गए थे. इसका असर ये हुआ कि तत्कालीन नरसिंह राव के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उनको बातचीत के लिए बुलाया. अपने करियर में दिवाकर भट्ट सिर्फ एक बार 2007 में देवप्रयाग सीट जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और उस दौर में जब बीसी खंडूरी के नेतृत्व वाली सरकार को बाहरी विधायकों के सपोर्ट की जरूरत पड़ी तो यूकेडी विधायक भट्ट आगे आए. बदले में उनको कैबिनेट मंत्री बनाया गया. अगले पांच सालों में भट्ट, बीजेपी के इतने करीब पहुंच गए कि 2012 का चुनाव उन्होंने बीजेपी के सिंबल पर लड़ा लेकिन हार गए. यूकेडी के नेता तब उनसे खासे नाराज हुए. साल 2017 में एक बार फिर फिर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भट्ट हार गए। अपना आखिरी चुनाव उन्होंने 2022 में यूकेडी के सिंबल पर देवप्रयाग से लड़ा पर बाजी हाथ नहीं लगी.धीरे धीरे उनकी सेहत गिरती चली गई। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक अपने अंतिम दिनों में दिवाकर भट्ट, न्यूरो की दिक्कत के कारण परेशान रहे. देहरादून के निजी अस्पताल में उनका इलाज चला लेकिन सर्वाइव नहीं कर पाए. भट्ट अपने पीछे पुत्र और परिवार छोड़ गए हैं. वो उस दौर के नेता थे जिन्होंने संघर्षों के साथ राजनीति की. वो यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष भी रहे। यूकेडी बेशक अब उत्तराखंड में मेंस्ट्रीम पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर पिछड़ गई है, लेकिन दिवाकर भट्ट सरीखे नेता, पार्टी की पहचान को जिंदा रखे हुए थे.









