
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्रदेश के एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति के मामले पर दायर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए आने वाले मंगलवार की तिथि नियत की है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री विभाग से कहा इससे सम्बन्धित एक मामला एकलपीठ में चल रहा है. उसे भी इसके साथ सूचिबद्ध करें. जिससे सभी मामलों की एक साथ सुनवाई हो सके.
आज सरकरा की तरफ से कहा गया कि वर्ष 1990 पूर्व शिक्षकों की वरिष्ठ सूची के आधार पर समस्त लाभ दे दिए गए. वर्ष 2005 से सीधी भर्ती व एडहॉक से हुए पदोन्नति का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. एक मामला एकलपीठ में भी विचाराधीन है. जिस पर कोर्ट ने उसको भी इन याचिकाओं के साथ सूचिबद्ध करने के निर्देश रजिस्ट्री विभाग को दिए हैं. दायर याचिकाओं में कहा है कि उनको पहले वरिष्ठता दी जाये. उनका चयन 2005 में सीधी भर्ती से हुआ. वहीं, कई अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि उनको पहले वरिष्ठता पर रखा जाये, क्योंकि वे एडहॉक प्रमोशन से आये हुए हैं. मामले के अनुसार प्रदेश के अनुसार एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति के मामले पिछले कई वर्षों से अटके पड़े हैं. इसको लेकर शिक्षक लंबे समय से सरकार से मांग करते आ रहे हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रधानाचार्य पद की सीधी भर्ती को निरस्त किया जाये. इस पद को पदोन्नति से भरा जाय न कि सीधी भर्ती से भरा जाये. वे वर्षों से कार्य करते आ रहे हैं. सरकार ने उनको इसका लाभ नहीं दिया है. जिस पर अभी तक कोई विचार नहीं किया गया है. कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं. उनको ग्रेच्युटी व पेंशन का लाभ मिल चुका है. उनकी भी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश भुवन चन्द्र कांडपाल के केस के आधार पर की जाये. सरकार ने उन्हें पदोन्नति दी है. आज मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्यय की खण्डपीठ में हुई.









