स्याल्दे में सड़क पर उतरीं मातृशक्ति, बेसहारा गोवंश को तहसील पहुंचाया

स्याल्दे में सड़क पर उतरीं मातृशक्ति, बेसहारा गोवंश को तहसील पहुंचाया

स्याल्दे क्षेत्रीय विकास सहित विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन 11वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारियों ने 20 नवंबर को तहसील घेराव का ऐलान किया है। विरोध के प्रतीक के रूप में तहसील परिसर के अंदर 300 गायों और बैलों को छोड़ा जाएगा। इस घेराव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की संभावना है।राकेश बिष्ट लगातार पांचवें दिन आमरण अनशन पर बैठे रहे, जबकि प्रमोद गिरी गोस्वामी, बालम सिंह रावत और ललित रावत क्रमिक अनशन में शामिल रहे। आंदोलन स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अनशनकारियों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक इलाज किया। स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्रीय नेता लगातार आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए समर्थन दे रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अब भी उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन और भी उग्र स्वरूप लेगा।आंदोलन का समर्थन करने वालों में जितेंद्र रजवार, दिगंबर धौलाखंडी, इंद्र सिंह रजवार, वीरेंद्र नगी, दौलत खाती, मनोज पटवाल, महिला मंगल दल की बिमला देवी, जानकी जोशी, महेशी बिष्ट, मंजू उप्रेती, दिया पपनोई, ममता बिष्ट, धर्मा देवी, कमला नेगी और मंजू रावत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद

रहे।

 

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