
देहरादून: कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो धर्म, संप्रदाय और समाज की सीमाओं से परे जाते हैं. देहरादून में यामिनी, उर्मिला और पूजा की कहानी भी उन्हीं में से एक है. बचपन में ही माता-पिता की छाया से वंचित यह तीनों बेटियां अपनी छोटी‑छोटी खुशियों के लिए संघर्ष कर रही थीं, तभी उनके जीवन में एक पिता बनकर इलियास और दादी रमिन्द्री आए, जिन्होंने उन्हें वह प्यार और सुरक्षा दी जो हर बच्चे को मिलनी चाहिए. साल 2007 में इलियास ने इन बच्चियों के लिए अपना घर शुरू किया और धीरे-धीरे कई अन्य अनाथ बच्चे भी इस परिवार से जुड़ते गए, जिससे एक नया परिवार बन गया. लेकिन जब रविवार को तीनों बेटियों को विदा करने का वक्त आया तो हर किसी की आंखे नम हो गई.हिंदू रीति रिवाज से हुई बेटियों की परवरिश
भले ही ये तीनों मुस्लिम पिता की छत्र छाया में पली बढ़ी लेकिन इलियास ने इन बेटियों की परवरिश पूरी हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ की और उन्हें पढ़ाई से लेकर अपने आशियाने तक सब कुछ दिया. यामिनी बताती हैं कि उनके पिता मुस्लिम हैं, लेकिन बच्चों के साथ कभी भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया. इसके चलते उन्होंने कभी अपने परिवार की कमी महसूस नहीं की और हर दिन सुरक्षित और खुशहाल महसूस किया.हर किसी की आंखे हो गई नम वहीं जब आज यानी रविवार को तीनों बेटियों की शादी का अवसर आया, तो इस मौके पर पिता इलियास की आंखें खुशी से नम हो गईं. उन्होंने अपनी बेटियों को विदा करते हुए यह सबसे पुण्य काम माना और उन्हें नए जीवन के लिए आशीर्वाद दिया. इस अवसर पर दादी रमिन्द्री मंद्रवाल ने बताया कि शादी के लिए 200 से ज्यादा आवेदन आए थे और काफी जांच के बाद उन्होंने योग्य लड़कों का चयन किया गया.










