
औषधीय गुणों का खजाना कहा जाने वाला बुरांश बसंत के आगमन से पहले ही खिल आया है। असमय खिला बुरांश का फूल सिर्फ एक प्राकृतिक घटना ही नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों की ओर इशारा कर रहे हैं। सामान्य समय सीमा से पहले खिलने से बुरांश की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। जिसे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गम्भीर खतरा माना जा रहा है।
समुद्रतल से 1500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उगने वाले बुरांश के फूल का खिलने का समय मार्च अप्रैल माह होता है, तब उत्तराखण्ड का राज्य वृक्ष बुरांश पूरे सबाब पर होता है और अपने लाल रंग से पहाड़ियों को लालिमा से भर देता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से इस वर्ष जनवरी मध्य से पहले ही बुरांश खिल आया है। जिसे पारिस्थिकी तंत्र के लिए खतरा माना जा रहा।










