
कालाढूंगी। भदौनी क्षेत्र में आदमखोर बाघ के लगातार हमलों में कई लोगों की जान जाने के बावजूद भी अब तक उसे मारने की अनुमति न मिल पाना शासन-प्रशासन की घोर विफलता और संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है।
सबसे गंभीर बात यह है कि माननीय जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं आगे आकर गारंटी ली गई थी कि शीघ्र ही बाघ को मारने की परमिशन मिल जाएगी, लेकिन आज तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के साथ खुला विश्वासघात है। ऐसे खोखले आश्वासन देने वाले जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर अब बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
क्षेत्र की जनता आज भी दहशत के साये में जीने को मजबूर है। हर दिन लोगों की जान खतरे में है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आखिर कब तक निर्दोष लोगों की जान यूं ही जाती रहेगी?
मैं, नीरज तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता, कड़े शब्दों में चेतावनी देता हूं कि यदि तत्काल प्रभाव से आदमखोर बाघ को मारने की अनुमति जारी नहीं की गई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो हम व्यापक और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और वादाखिलाफी करने वाले जनप्रतिनिधियों की होगी।








